आप दुसरो के साथ वैसा ही व्यवहार करे जैसा आप उनसे आशा करते हैं |

Posts in "Spiritual - Related to God" Category

  • Full Faith in God

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    17 Jul 2016

    Full Faith in God (पूर्ण विश्वास)

    कृष्ण भोजन के लिए बैठे थे। एक दो कौर मुँह में लेते ही अचानक उठ खड़े हुए। बड़ी व्यग्रता से द्वार की तरफ भागे, फिर लौट आए उदास और भोजन करने लगे।
              रुक्मणी ने पूछा," प्रभु,थाली छोड़कर इतनी तेजी से क्यों गये ? और इतनी उदासी लेकर क्यों लौट आये?"
              कृष्ण ने कहा, " मेरा एक प्यारा राजधानी से गुजर रहा है। नंगा फ़कीर है। इकतारे पर मेरे नाम की धुन बजाते हुए मस्ती में झूमते चला जा रहा है। लोग उसे पागल समझकर उसकी खिल्ली उड़ा रहे हैं। उस पर पत्थर फेंक रहे हैं। और…

  • Guru Purnima - Celebrate July 19, 2016

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    19 Jul 2016

    Guru Purnima (गुरुपूर्णिमा)
    Guru Purnima - Celebrate July 19, 2016 

    | गुरुब्रम्हा गुरुविष्णु गुरुदेवो महेश्वरा |
      | गुरु साक्षात् परब्रम्ह तस्मय श्री गुरवे नमः |

    गुरु गोविंद दोनों खड़े किनको लागु पाय!!!
    बलि हारी गुरु आप की गोविन्द दियो बताय...

    हर साल आती गुरुपूर्णिमा,
    शिष्यत्व का जागरण कराती गुरुपूर्णिमा।
    गुरु स्मरण कराने आती गुरुपूर्णिमा,
    शिष्यों को उनके वादे याद दिलाती गुरुपूर्णिमा।

    शिष्य की निष्ठा का प्रमाण है गुरुपूर्णिमा,
    शिष्य की श्रद्धा की सम्पूर्णता है गुरुपूर्णिमा।
    सद्गुरु के वरदानों …

  • Bharti Sanskrati

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    30 Jun 2016

    भारतीय संस्कृति

    अपने भारत की संस्कृति को पहचानें | अपने बच्चों को भी ये सब बताए |

    दो पक्ष - कृष्ण पक्ष, शुक्ल पक्ष

    तीन ऋण – देव ऋण, पितृ ऋण, ऋषि ऋण

    चार युग – सतयुग, त्रेतायुग, द्धापरयुग, कलियुग

    चार धाम – द्धारिका, बद्रीनाथ, जगन्नाथ, रामेश्वर धाम

    चारपीठ – शारदा पीठ (द्धारिका), ज्योतिष पीठ(जोशीमठ बदरीधाम), गोवर्धन पीठ(जगन्नाथपुरी), श्रंगेरीपीठ

    चार वेद – ऋग्वेद, अर्थवेद, यजुर्वेद, सामवेद

    चार आश्रम – ब्रम्हाचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास

    चार अन्त:करण – मन, बुद्धि, चित, अहंकार

    पञ्…

  • God Tusi Great Ho jai shree Krishna

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    25 Apr 2016

    बहुत समय पहले की बात है वृन्दावन में...

    श्रीबांके बिहारी जी के मंदिर में रोज पुजारी जी बड़े भाव से सेवा करते थे। वे रोज बिहारी जी की आरती करते , भोग लगाते और उन्हें शयन कराते और रोज चार लड्डू भगवान के बिस्तर के पास रख देते थे। उनका यह भाव था कि बिहारी जी को यदि रात में भूख लगेगी तो वे उठ कर खा लेंगे। और जब वे सुबह मंदिर के पट खोलते थे तो भगवान के बिस्तर पर प्रसाद बिखरा मिलता था। इसी भाव से वे रोज ऐसा करते थे।

    एक दिन बिहारी जी को शयन कराने के बाद वे चार लड्डू रखना भूल गए। उन्होंने पट बंद किए और…

  • Four precious gems चार कीमती रत्न

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    20 Apr 2016

     चार कीमती रत्न:-

    1~पहला रत्न है: "माफी"
    तुम्हारे लिए कोई कुछ भी कहे, तुम उसकी बात को कभी अपने मन में न बिठाना, और ना ही उसके लिए कभी प्रतिकार की भावना मन में रखना, बल्कि उसे माफ़ कर देना।

    2~दूसरा रत्न है: "भूल जाना"
    अपने द्वारा दूसरों के प्रति किये गए उपकार को भूल जाना, कभी भी उस किए गए उपकार का प्रतिलाभ मिलने की उम्मीद मन में न रखना।

    3~तीसरा रत्न है: "विश्वास"
    हमेशा अपनी महेनत और उस परमपिता परमात्मा पर अटूट विश्वास रखना । यही सफलता का सूत्र है ।

    4~चौथा रत्न है: "वैराग्य"
    हमेशा यह याद रखना कि जब हमारा …