आग्नि स्वर्ण को परखती है मुसीबत विरों को |

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22 Sep 17
Aarti shree Laxmi ji ki - लक्ष्मी जी की आरती

 श्री लक्ष्मी जी की आरती (Laxmi ji ki aarti)

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता |
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता || जय

ब्रह्माणी रूद्राणी कमला, तू हि है जगमाता |
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता || जय

दुर्गा रूप निरंजन, सुख सम्पति दाता |
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता || जय

तू ही है पाताल बसन्ती, तू ही है शुभ दाता |
कर्म प्रभाव प्रकाशक, भवनिधि से त्राता || जय

जिस घर थारो वासो, तेहि में गुण आता |
कर न सके सोई कर ले, मन नहिं धड़काता || जय

तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न कोई पाता |
खान पान को वैभव, सब तुमसे आता || जय

शुभ गुण सुंदर मुक्त्ता, क्षीर निधि जाता |
रत्त्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नही पाता || जय

आरती लक्ष्मी जी की, जो कोई नर गाता |
उर आनन्द अति उपजे, पाप उतर जाता || जय

स्थिर चर जगत बचावे, शुभ कर्म नर लाता |
राम प्रताप मैया की शुभ दृष्टि चाहता || जय


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