“जीत” किसके लिए, ‘हार’ किसके लिए, ‘ज़िंदगी भर’ ये ‘तकरार’ किसके लिए… जो भी ‘आया’ है वो ‘जायेगा’ एक दिन, फिर ये इतना “अहंकार” किसके लिए…

Posts in "Motivational" Category

  • A Short Story - ​खाली पेट -​ (लघुकथा)

    Category : Motivational By : Anonymous
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    04 Feb 2018

    ​खाली पेट -​ (लघुकथा)
     
    लगभग दस साल का बालक राधा का गेट बजा रहा है।
    राधा ने बाहर आकर पूंछा
    "क्या है ? "
    "आंटी जी क्या मैं आपका गार्डन साफ कर दूं ?"
    "नहीं, हमें नहीं करवाना।"
    हाथ जोड़ते हुए दयनीय स्वर में "प्लीज आंटी जी करा लीजिये न, अच्छे से साफ करूंगा।"
    द्रवित होते हुए "अच्छा ठीक है, कितने पैसा लेगा ?"
    "पैसा नहीं आंटी जी, खाना दे देना।"
    " ओह !! अच्छे से काम करना।"
    "लगता है, बेचारा भूखा है।पहले खाना दे देती हूँ। राधा बुदबुदायी।"
    "ऐ 
    लड़के ! पहले खाना खा ले, फिर काम करना।
    "नहीं आंट…

  • A Life Story - एक प्रसंग जिंदगी का

    Category : Motivational By : Anonymous
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    04 Feb 2018

    एक प्रसंग जिंदगी का

    एक राजा बहुत दिनों से पुत्र की प्राप्ती के लिये आशा लगाये बैठा था,
    पर पुत्र नही हुआ।
    उसके सलाहकारों ने तांत्रिकों से सहयोग की बात बताई।
    सुझाव मिला कि किसी बच्चे की बलि दे दी जाये तो पुत्र प्राप्ती हो जायेगी।
    राजा ने राज्य में ये बात फैलाई कि जो अपना बच्चा देगा
    उसे बहुत सारे धन दिये जायेगे।
    एक परिवार में कई बच्चें थे, गरीबी भी थी,
    एक ऐसा बच्चा भी था जो ईश्वर पर आस्था रखता था
    तथा सन्तों के संग सत्संग में ज्यादा समय देता था।
    परिवार को लगा कि इसे राजा को दे दिया जाये
    क्योंकि ये कुछ का…

  • Karma is real destiny - कर्म ही असली भाग्य

    Category : Motivational By : Anonymous
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    30 Apr 2018

    Karma is real destiny  (कर्म ही असली भाग्य)



    तेरा मेरा करते एक दिन चले जाना है,
           जो भी कमाया यही रह जाना है !

    कर ले कुछ अच्छे कर्म,
          साथ यही तेरे जाना है !

    रोने से तो आंसू भी पराये हो जाते हैं,

           लेकिन मुस्कुराने से...
    पराये भी अपने हो जाते हैं !

           मुझे वो रिश्ते पसंद है,
    जिनमें  " मैं " नहीं  " हम " हो !!

                 इंसानियत दिल में होती है, हैसियत में नही,
                           उपरवाला कर्म देखता है, वसीयत नही..

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    जीवन में किसी को…

  • Very touching & inspiring “जीवन के लिए खर्च” या “खर्च के लिए

    Category : Motivational By : Anonymous
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    24 Apr 2018

    very touching & inspiring
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    पत्नी ने कहा - आज धोने के लिए ज्यादा कपड़े मत निकालना…
     
    पति- क्यों??
     
    उसने कहा..- अपनी काम वाली बाई दो दिन नहीं आएगी…
     
    पति- क्यों??
     
    पत्नी- गणपति के लिए अपने नाती से मिलने बेटी के यहाँ जा रही है, बोली थी…
     
    पति- ठीक है, अधिक कपड़े नहीं निकालता…
     
    पत्नी- और हाँ!!! गणपति के लिए पाँच सौ रूपए दे दूँ उसे? त्यौहार का बोनस..
     
    पति- क्यों? अभी दिवाली आ ही रही है, तब दे देंगे…
     
    पत्नी- अरे नहीं बाबा!! गरीब है बेचारी, बेटी-नाती…

  • Angry - गुस्सा

    Category : Motivational By : Anonymous
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    06 Feb 2018

    Angry - गुस्सा

     "पितामह भीष्म के जीवन का एक ही पाप था कि उन्होंने समय पर क्रोध नहीं किया
     और
    जटायु के जीवन का एक ही पुण्य था कि उसने समय पर क्रोध किया...
    परिणामस्वरुप एक को बाणों की  शैय्या मिली
    और
     एक को प्रभु श्री राम की गोद..

          अर्थात
    क्रोध भी तब पुण्य बन जाता है जब वह धर्म और मर्यादा की रक्षा के लिए किया जाए
    और
    सहनशीलता भी तब पाप बन जाती है जब वह धर्म और मर्यादा की रक्षा ना कर पाये।"