❝आगे बढ़ने के चार सूत्र :- 1. व्यस्त रहे, मस्त रहे 2. सुख बांटे: दु:ख बंटाये 3. मिल बाँट कर खायें 4. सलाह ले, सम्मान दे❞

Posts in "Spiritual - Related to God" Category

  • Story of Banke bihaaree jee ka bhakt

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    25 Jul 2017

    ( बिहारी जी का भक्त )

    बिहारी जी का एक भक्त उनके दर्शन करने वृंदावन गया - वहाँ उसे उनके दर्शन नहीं हुए।  मंदिर में बड़ी भीड़ थी, लोग उससे चिल्ला कर कहते ‘‘अरे ! बिहारी जी सामने ही तो खड़े हैं,  पर वह कहता है कि भाई। मेरे को तो नहीं दिख रहे।’’  वो मूर्ति को बिहारी जी मानने को तैयार ही नहीं था,  उसके नेत्र प्यासे ही रह जाते इस तरह तीन दिन बीत गए पर उसको दर्शन नहीं हुए।

     उस भक्त ने ऐसा विचार किया कि सबको दर्शन होते हैं और मुझे नहीं होते, तो मैं बड़ा पापी हूं कि ठाकुर जी दर्शन नहीं देते,  मेरे …

  • Parmatma - परमात्मा

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    25 Jul 2017

    एक 6 साल का छोटा सा बच्चा अक्सर परमात्मा से मिलने की जिद किया करता था। उसे परमात्मा के बारे में कुछ भी पता नही था पर मिलने की तमन्ना, भरपूर थी। उसकी चाहत थी की एक समय की रोटी वो परमात्मा के सांथ खाये। 1 दिन उसने 1 थैले में 5 ,6 रोटियां रखीं और परमात्मा को को ढूंढने निकल पड़ा। चलते चलते वो बहुत दूर निकल आया संध्या का समय हो गया। उसने देखा नदी के तट पर 1 बुजुर्ग बूढ़ा बैठा हैं,जिनकी आँखों में बहुत गजब की चमक थी, प्यार था, और ऐसा लग रहा था जैसे उसी के इन्तजार में वहां बैठा उसका रास्ता देख रहा हों। व…

  • True Line

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    17 Jul 2016


    True Line




    कितना सत्य है ना.....

    भक्ति जब भोजन में प्रवेश करती है,
    भोजन 'प्रसाद' बन जाता है।
    भक्ति जब भूख में प्रवेश करती है,
    भूख 'व्रत' बन जाती है।
    भक्ति जब पानी में प्रवेश करती है,
    पानी 'चरणामृत' बन जाता है।
    भक्ति जब सफर में प्रवेश करती है,
    सफर 'तीर्थयात्रा' बन जाता है।
    भक्ति जब संगीत में प्रवेश करती है,
    संगीत 'कीर्तन' बन जाता है।
    भक्ति जब घर में प्रवेश करती है,
    घर 'मन्दिर' बन जाता है।
    भक्ति जब कार्य में प्रवेश करती है,
    कार्य 'कर्म' बन जाता है।
    भक्ति जब क्रिया में प्रवेश करती है,
    क्रिया 'सेवा' …

  • Inspirational Thoughts (पंडित जी का एक प्रर्रेक प्रसंग)

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    17 Jul 2016

    Inspirational Thoughts (पंडित जी का एक प्रर्रेक प्रसंग)

    एक नगर
    मे रहने वाले एक पंडित जी की ख्याति दूर-दूर तक थी।
    पास ही के गाँव मे स्थित मंदिर के पुजारी का आकस्मिक निधन होने की वजह से,
    उन्हें वहाँ का पुजारी नियुक्त किया गया था।

      एक बार वे अपने गंतव्य की और जाने के लिए बस मे चढ़े,
    उन्होंने कंडक्टर को किराए के रुपये दिए और सीट पर जाकर बैठ गए।

      कंडक्टर ने जब किराया काटकर उन्हे रुपये वापस दिए तो
    पंडित जी ने पाया की कंडक्टर ने दस रुपये ज्यादा दे दिए है। पंडित जी ने सोचा कि थोड़ी देर बाद कं…

  • Love u Mom

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    31 May 2017

    Love u Mom 

    लेती नहीं दवाई "माँ",

    जोड़े पाई-पाई "माँ"।
    .
    दुःख थे पर्वत, राई "माँ",
    हारी नहीं लड़ाई "माँ"।
    .
    इस दुनियां में सब मैले हैं,
    किस दुनियां से आई "माँ"।
    .
    दुनिया के सब रिश्ते ठंडे,
    गरमागर्म रजाई "माँ" ।
    .
    जब भी कोई रिश्ता उधड़े,
    करती है तुरपाई "माँ" ।
    .
    बाबू जी तनख़ा लाये बस,
    लेकिन बरक़त लाई "माँ"।
    .
    बाबूजी थे सख्त मगर ,
    माखन और मलाई "माँ"।
    .
    बाबूजी के पाँव दबा कर
    सब तीरथ हो आई "माँ"।
    .
    नाम सभी हैं गुड़ से मीठे,
    मां जी, मैया, माई, "माँ" ।
    .
    सभी साड़ियाँ छीज गई थीं,
    मगर नहीं कह पाई "माँ" ।
    .
    घर में चूल्हे मत बाँटो रे…