बता सको तो राह बताओं, पथ भटकना मत सिखों |

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  • True Line

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    17 Jul 2016


    True Line




    कितना सत्य है ना.....

    भक्ति जब भोजन में प्रवेश करती है,
    भोजन 'प्रसाद' बन जाता है।
    भक्ति जब भूख में प्रवेश करती है,
    भूख 'व्रत' बन जाती है।
    भक्ति जब पानी में प्रवेश करती है,
    पानी 'चरणामृत' बन जाता है।
    भक्ति जब सफर में प्रवेश करती है,
    सफर 'तीर्थयात्रा' बन जाता है।
    भक्ति जब संगीत में प्रवेश करती है,
    संगीत 'कीर्तन' बन जाता है।
    भक्ति जब घर में प्रवेश करती है,
    घर 'मन्दिर' बन जाता है।
    भक्ति जब कार्य में प्रवेश करती है,
    कार्य 'कर्म' बन जाता है।
    भक्ति जब क्रिया में प्रवेश करती है,
    क्रिया 'सेवा' …

  • Inspirational Thoughts (पंडित जी का एक प्रर्रेक प्रसंग)

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    17 Jul 2016

    Inspirational Thoughts (पंडित जी का एक प्रर्रेक प्रसंग)

    एक नगर
    मे रहने वाले एक पंडित जी की ख्याति दूर-दूर तक थी।
    पास ही के गाँव मे स्थित मंदिर के पुजारी का आकस्मिक निधन होने की वजह से,
    उन्हें वहाँ का पुजारी नियुक्त किया गया था।

      एक बार वे अपने गंतव्य की और जाने के लिए बस मे चढ़े,
    उन्होंने कंडक्टर को किराए के रुपये दिए और सीट पर जाकर बैठ गए।

      कंडक्टर ने जब किराया काटकर उन्हे रुपये वापस दिए तो
    पंडित जी ने पाया की कंडक्टर ने दस रुपये ज्यादा दे दिए है। पंडित जी ने सोचा कि थोड़ी देर बाद कं…

  • Love u Mom

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    31 May 2017

    Love u Mom 

    लेती नहीं दवाई "माँ",

    जोड़े पाई-पाई "माँ"।
    .
    दुःख थे पर्वत, राई "माँ",
    हारी नहीं लड़ाई "माँ"।
    .
    इस दुनियां में सब मैले हैं,
    किस दुनियां से आई "माँ"।
    .
    दुनिया के सब रिश्ते ठंडे,
    गरमागर्म रजाई "माँ" ।
    .
    जब भी कोई रिश्ता उधड़े,
    करती है तुरपाई "माँ" ।
    .
    बाबू जी तनख़ा लाये बस,
    लेकिन बरक़त लाई "माँ"।
    .
    बाबूजी थे सख्त मगर ,
    माखन और मलाई "माँ"।
    .
    बाबूजी के पाँव दबा कर
    सब तीरथ हो आई "माँ"।
    .
    नाम सभी हैं गुड़ से मीठे,
    मां जी, मैया, माई, "माँ" ।
    .
    सभी साड़ियाँ छीज गई थीं,
    मगर नहीं कह पाई "माँ" ।
    .
    घर में चूल्हे मत बाँटो रे…

  • Short Story for Money

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    24 May 2017

    Short Story for Money 

    पुराने ज़माने की बात है। किसी गाँव में एक सेठ रहेता था। उसका नाम था नाथालाल सेठ। वो जब भी गाँव के बाज़ार से निकलता था तब लोग उसे नमस्ते या सलाम करते थे , वो उसके जवाब में मुस्कुरा कर अपना सिर हिला देता था और बहुत धीरे से बोलता था की " घर जाकर बोल दूंगा "

    एक बार किसी परिचित व्यक्ति ने सेठ को ये बोलते हुये सुन लिया। तो उसने कुतूहल वश सेठ को पूछ लिया कि सेठजी आप ऐसा क्यों बोलते हो के " घर जाकर बोल दूंगा "
    तब सेठ ने उस व्यक्ति को कहा, में पहले धनवान नहीं था उस समय लोग मुझे 'ना…

  • Death is inevitable "मृत्यु टाले नहीं टलती चाहे कितनी

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    17 Jul 2016

     Death is inevitable "मृत्यु टाले नहीं टलती 

    भगवान विष्णु गरुड़ पर बैठ कर कैलाश पर्वत पर गए।
    द्वार पर गरुड़ को छोड़ कर खुद शिव से मिलने अंदर
    चले गए। तब कैलाश की अपूर्व प्राकृतिक शोभा
    को देख कर गरुड़ मंत्रमुग्ध थे कि तभी उनकी नजर
    एक खूबसूरत छोटी सी चिड़िया पर पड़ी।
    चिड़िया कुछ इतनी सुंदर थी कि गरुड़ के सारे
    विचार उसकी तरफ आकर्षित होने लगे।
    उसी समय कैलाश पर यम देव पधारे और अंदर जाने से
    पहले उन्होंने उस छोटे से पक्षी को आश्चर्य की
    द्रष्टि से देखा। गरुड़ समझ गए उस चिड़िया का अंत
    निकट है और यमदेव कैलाश से निकलत…